सूरज लगाता है सूरजमुखी के चक्कर
हम हमारी जिंदगी में कितने किरदार निभाते है न? "रात के अंधेरे को कभी सितारों की ज़रूरत नहीं होती लेकिन सितारों के चमकने के लिए अंधेरे का होना ज़रूरी है।" प्रोफेसर साहब इतना लिख कर रुक गए हैं, जैसे कोई एकदम से नींद से जागा दे, या फिर अचानक से शोर के बाद आपको घड़ी की टिक ~टिक सुनाई देने लग जाए। जैसे किसी विचार ने घबराहट पैदा कर दी हो। प्रोफ़ेसर साहब मेरी ज़िंदगी के एक अहम किरदार है। ये किरदार भले ही मन घड़ंत है पर इनकी कहानियां मेरे बहुत करीब हैं। प्रोफेसर साहब असल में दो व्यक्ति हैं, एक जो लिखता है, जिसने अभी तक 4 किताबें लिख दी हैं और दूसरा जो प्रेम करता है, जिसके कारण अभी प्रोफेसर साहब लिखते लिखते रुक गए है। अब इस खामोशी का कारण मैं आपको बताता हूं, प्रोफेसर साब से मत कहिएगा , बुरा मान जायेंगे ,मेरे अच्छे दोस्त हैं, हर दम साथ रहते हैं। प्रोफेसर साहब जब 20 साल के थे याने कि आज से कुछ 10 साल पहले तब उनको पहली बार प्रेम का अनुभव हुआ और ऐसा हुआ की आज सब खत्म होने का बाद भी वो अनुभव वैसा का वैसा होता है। प्रोफेसर साब की एक खास बात है, उन्होंने प्रेम में कभी भी बुद्धि का इस्तेमाल ...